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कथा सत्य की

  • Writer: Suman Sharma
    Suman Sharma
  • Feb 19, 2024
  • 9 min read

नारदजी नेअपने हाई टेक स्क्रीन टच सुपर लैपटाप के एप लांचर अर्थात वैफल पर जैसे ही टच किया , अनेक आइकन व उनके नाम स्क्रीन पर दिखाई देने लगे । लाल मंगल , श्वेत चाँद , प्लूटो , वीनस इयादि । इन सभी आइकन्स पर नजर फेरते हुए जब शंख पर उनकी नजर पड़ी उनके चेहरे पर प्रसन्नता और शांति का मिलाजुला भाव उभर आया । उनके हाथ अपने इष्ट प्रभु श्री हरि के शंख को देखते ही जुड़ गए , नारायण के स्मरण मात्र से चेहरे पर अपार सुख व शांति का ऐसे प्रसार हुआ जैसे तपती हुई धरा मेघ बिन्दुओं से तृप्त हो गई हो I नारदजी की आँखे ध्यान हेतु मुंद गईं और मुख से स्वर निकला ," नारायण नारायण ! "

नारदजी को ध्यान आया प्रभु दर्शन

का कार्य यद्यपि प्राथमिकता सूची में सर्वोपरि रखा गया है फिर भी विलंबित है ! उन्होंने झट से शंख आइकन पर क्लिक किया। आखिर कार प्रभु से मिलने पर पृथ्वी वासियों का रिर्पोट भी सबमिट करना होगा । शंख पृथ्वी वासी व परम सत्ता के बीच होनेवाले पत्राचारों ,अभिलेखों का एप है । प्रभु को शंख प्रिय है और माता लक्ष्मी जी को अपने इस सहोदर से विशेष लगाव हैं क्योंकि उनका यह भाई सदा उनके पति के साथ रहकर सभी जीवों को परम सत्ता से सदा जुड़े रहने के लिए भीतर का नाद सुनने को प्रेरित करता है ।

शंख आइकन पर क्लिक करते ही नोटिफिकेशन और मेसेज की भरमार को देख बेचारे नारदजी को आभास हुआ कि कोरोना काल में त्राहिमाम , त्राहीमाम के संदेशों की अधिकता के चलते नारदजी ने इस एप के नोटिफिकेशन को म्यूट कर दिया था , इसलिए धरती लोक की इन समस्याओं का अपडेट उन्हें नहीं मिल पाया । उन्होंने झट से अपने सुपर लैपटाप को रिमाइंडर अपडेट न करने के लिए रिपोर्ट किया ।

अब नारदजी स्मार्ट तरीके से पूरे साल भर का ब्योरा तैयार कर , अपने सुपर लैप टाप के कांपेक्ट वर्जन को हाथ में लिए प्रभु दर्शन के लिए श्रीमन नारायण ,नारायण का मधुर गान करते हुए चल दिए । कुछ क्षण पश्चात ही उन्हें धरती से देवलोक के यात्रा मे लगने वाले समय के सदुपयोग का ध्यान आया और उन्होंने झट से धरती के भिन्न भिन्न हिस्सों के अपने प्रतिनिधियों को संपर्क कर ,धरती पर मानवता और धर्म की अपडेटेट फाइल अगले दो मिनट में सबमिट करने का फरमान सुनाया । उन्हें बड़ी तसल्ली हुई , धरती पर उनके शिष्य बड़ी निष्ठा से उनका कार्य कर रहे थे , सभी चैनल्स के बडे नामी रिपोर्टर खबरों को पलक झपकते ही पृथ्वी के एक छोर से दूसरे छोर तक बिजली की गति सें पहुँचा देते । ऐसे ही एक रिपोर्टर के रिपोर्ट नोटिफिकेशन की घंटी बजी , नारदजी ने क्लिक किया ।

रिपोर्टर एक सनसनी खेज खबर बड़े आवेश से सुना रहा था , " कलियुग में सत्य नारायण की कथा और व्रत से कष्टों से मुक्ति का उपाय बताया गया है लेकिन पृथ्वी वासी यह आरोप लगा रहे हैं कि उनकी पूजा और उनके संदेश प्रभु तक नहीं पहुंच रहे । कहीं कुछ भारी गड़बड़ है ।

क्या , प्रभु तक संदेश नहीं पहुंच रहे ?

या प्रभु सत्य देव जी का टांसफर किसी अन्य ग्रह पर हुआ है ?

,या फिर त्राहिमाम त्राहिमाम संदेशों को सुनकर भी धरती के रहिवासियो की अनदेखी की जा रही है , मृत्युलोक इन तमाम सवालों के जवाब चाहता है !

सत्य तक चैनल ने अपनी रिपोर्ट धरती के देवदूतावास को भेज दी है । हम लगातार देवदूत श्री नारद जी से संपर्क बनाने की कोशिश कर रहे है , देखते है देवदूत नारद जी का इस पर क्या कहना है ।


पृथ्वी ,भरतखंड से कैमरा परसन त्रिनेत्री के साथ मैं सुमन शर्मा , सत्य तक के लिए ।



खिसियाए से नारद अपनी रिपोर्ट देखने लगे ।


रिर्पोट कुछ इस प्रकार था ,2001 से 2020 के कालखंड में पृथ्वी नामक ग्रह पर अध्यात्म व धर्म की खूब चर्चा हुई।

मदिर मस्जिद, गुरुद्वारे की संख्या में दुगुनी वृद्धि हुई । तीर्थ स्थलों पर यात्रा करने वाले तीर्थ यात्री लगभग 80 % बढ़े ।

दान धर्म , भंडारों की संख्या में भी आशातीत वृद्धि हुई है, लेकिन लोगों में अशांति है ।

लोग सत्य जानना चाहते हैं । अब सत्य देवजी के व्रत से भी काम बनता न दिखने पर लगभग 90% लोग आशंकित है ।


एक बार रिपोर्ट पढ़कर तसल्ली करने के बाद प्रभु दर्शन के बारे में सोचते हुए नारद जी को बड़ी ग्लानि होने लगी , इस आभासी दुनिया के भ्रम में पड़कर प्रभु दर्शन में इतनी देरी !

अपने परम भक्त नारद के बारे में क्या सोचते होंगे प्रभु!

नारदजी को आश्चर्य हो रहा था ,इस बार प्रभु ने भी क्यों सुध नहीं ली । जब वे मोहिनी के भ्रमजाल में फँसे थे तब तो श्री हरि ने उन्हें बचा लिया था ।

और अब … कहीं धरती वासियों का कहना सही तो नहीं , जब मुझ जैसे भक्त को भूल गए हैं तब … ?

प्रभु बदल गए हैं ! पहले की तरह भक्तों के लिए दौड़ने को तत्पर नहीं रहते ।

मन में प्रभु के लिए शंका व जिह्वा पर नारायण नारायण का जयघोष करते हुए जब नारद जी विष्णुलोक पहुॅचे तो , माता लक्ष्मी विष्णुजी की मुद्रा में लेटी हुई थी, और श्री हरि विष्णु बड़े मनोयोग से माँ के पैर दबा रहे थे । माता लक्ष्मी उठने को हुई तो विष्णुजी बोले , हे चंचले! विश्राम करो !

अब तो आपके पुत्र नारद भी आपकी सेवा में तत्पर हैं।

नारदजी ठिठक गए , प्रभु के इस रूप व स्थिति को देख । अब सकल ब्रम्हांड की चिंता उन्हें सताने लगी । सृष्टि के पालनहार यहाँ इस तरह व्यस्त रहे तो .. वे क्या उत्तर देंगे धरती के दूतावास को ।

उनका ह्रदय हीलियम से भी महा शक्तिशाली इस अभिमान नामक गैस से फूला नहीं समा रहा था। जैसे कभी कभी किसी बडी कंपनी के अदने से कर्मचारी को लगता हैं कि कंपनी केवल उसी की बदौलत चल रही हैं क्योंकि उसके ऊपर के सभी अयोग्य अधिकारी मात्र अपने भाग्य के अतिशय बलवान होने के कारण परम पद के अधिकारी हैं , वैसा ही भाव मन में लिए महाशय नारद विष्णुलोक में स्तब्ध खड़े थे ।


नारदजी की मनःस्थिति को भांपते हुए प्रभु बोले, " संदेह को दबाने से सत्य का उद्घाटन नहीं होता नारद ! पूछो , क्या पूछना चाहते हो ? " नारद सिटपिटाते हुए बोले, "भगवन , क्या माता कुछ अस्वस्थ …. " उत्तर में विष्णुजी मुस्कुराते रहे, उन्हें इस तरह सहज व शांत मुद्रा में देखना नारद जी की व्याकुलता और उलझन को बढा रहा था । नारदजी ने माता लक्ष्मी की ओर देखा वे भी मुस्कुरा रहीं थी ।


नारद जी सोचने लगे , प्रभु बदल गए हैं !


नारदजी बोले , नारद ‘जी , बड़ी देर कर दी इस बार दर्शन देने में ? प्रतीत होता है पृथ्वी लोक भा गया है आपको ।



इसलिए पृथ्वी वासियों की तरह आप भी सत्यमेव जयते का जयघोष तो करते है पर सत्य को स्वीकारने का न तो साहस रखते हैं और न इच्छा।

विष्णुजी की दृष्टि इस समय नारद के वस्त्रों पर थी। सूट बूट, टाई , हैट व हाथ में लैपटाप ।

“ ! आप ‘तो पूरी तरह बदल गए ।”

भगवान ने कहा," नारद जी ,अपनी वीणा नहीं लाएँ ? वैसे ,इस नई वेशभूषा में जँच रहें हैं आप!

कहिए, क्या कोई विशेष प्रयोजन हैं इस औचक आगमन का?

नारद कभी " जी प्रभु " कभी "जी नहीं प्रभु " कहते उलझन में पड़े थे ।

पहली बार प्रभु के सामने अपनी इस वेश भूषा से लज्जित नारद ने झट अपना लैपटाप ऑन किया ,आकाश के विस्तृत क्षितिज के बृहद प्रोजेक्टर पर डिस्प्ले करते हुए , आंकड़ों के आधार पर दिए गए अपने प्रेजेन्टेशन को कनक्लूड करते हुए वे बोले " प्रभु धरती वासी सत्य देव व्रत व कथा के प्रति सशंकित हैं कृपया उपाय बताइए। ”

श्री हरि ने लाल रंग के कपड़े में बंधे अपने विस्तृत फाइल को मौली की डोर से बँधे ताड़ पत्रों की फाइल को खोल कर देखा और फिर कहा ," अच्छा , विक्रम सवंत 3001, तिथि कार्तिक पूर्णिमा । बम्ह्र मुहूर्त ठीक है ? "

प्रभु से ऐसे व्यवहार की आशा न थी नारद को। बोल पड़े , भगवन आप तो अपने भक्तों के लिए सब कुछ छोड़कर दौड़ते थे , अब मुझसे बात करने के लिए इतने दिनों बाद का अपॉइंटमेंट ।


(नाराज होते हुए ) आप बदल गए हैं , सचमुच बदल गए हैं आप ।


नारदजी आप भी… ।

आप भी पृथ्वी वासियों की तरह सत्यमेव जयते का जयघोष तो करते पर सत्य को स्वीकारने का न तो साहस रखते हैं और न इच्छा ।

और मैं कहाँ बदला हूँ । देखिए , अपने पुरानी फाइल (दस्तावेजों ) को दिखाते हुए ।


बदल तो आप गए हैं नारदजी !

बदलाव में कुछ गलत भी नहीं, किंतु आप अभी सकारात्मक बदलाव के लिए तैयार नहीं ।

( नारदजी को आश्चर्य हो रहा था कि भगवन ने अब तक उनके सुपर लैपटाप व उनके काम के अत्याधुनिक तरीके की तारीफ क्यों नहीं की । इस लिए बार बार लैपटाप की ओर ध्यान आकर्षित करने वाली हरकत करने लगे । जब फिर भी भगवान का ध्यान नहीं गया तो खिसियाते हुए बोले , सकारात्मक बदलाव ?


देखिए मेरे इस उपकरण को ।

समस्त बम्हांड की जानकारी है इसमें । अब मुझे पल पल की खबर के लिए यहाँ वहाँ दौड़ना नही पड़ता ।

( चेहरे पर दुःख मिश्रित निर्विकार भाव से )


वस्त्र ,आभूषण , और यंत्रों को तो आप ने बदल लिया, बस बदलाव की आत्मा को बदलना भूल गए नारद !

"बदलाव की आत्मा ! " नारद किंकर्तव्यविमूढ़ से बोले ।

हाँ , बदलाव की आत्मा । आपको लगता है मैं बदल गया हूँ अपने भक्तों के लिए पहले की तरह नहीं दौड़ पड़ता । ठीक है आज मैं अपने प्रिय भक्त नारद के लिए नहीं रखता अपॉइंटमेंट । क्या आप सुनने को हैं तैयार ?


धरती वासियों की समस्या लेकर आए हैं न आप ? जाइए पहले उनकी समस्या के मूल कारणों का संज्ञान तो लीजिए।

उनकी शिकायत है क्या ?

आप क्या चाहते हैं मुझसे ?

जाइए और पहले शोध कीजिए ।

इसलिए सवंत 3001 का समय दिया है आपको ।

(नारद कुछ पल सोचते हुए स्वगत

हाँ ,मैने त्राहिमाम संदेशों के आधार पर ही …

इतनी बडी भूल कैसे ?

फिर झट से अपने लैपटाप के स्क्रीन पर लाइव पृथ्वी को ऑन कर दिया ।

प्राजेक्टर पर पृथ्वी के दृश्य दिखाई देने लगे ।

पहला दृश्य

सत्य नारायण व्रत की तैयारी करते दंपति , फल कदली , चौकी , रंगोली आरती व तत्पश्चात प्रसाद व भोजन की तैयारी में जुटा परिवार ।

दूसरा दृश्य

पुरोहित की व्यस्तता , समय पर न पहुंच पाने पर उनका झूठ , कथा सुननेवाले दंपति का कथा आरंभ हाने के पहले ही बार बार कथा संपूर्ण होने में लगनेवाला समय पूछना और धीरे से शार्ट कट का आग्रह ।

‘तीसरा दृश्य

कथा के दूसरे अध्याय में ही बीच में पंडित जी के मोबाइल की घंटी बजना व उनका कहना “, हाँ , हाँ पहुँच रहा हूँ , स्टेशन तक पहुँच गया हूँ । “

चौथा दृश्य

माता लक्ष्मी व गणेश पूजन करते लोग

कनक धारा स्रोत , श्री सुक्त का रिकार्ड , सुंदर रंगोली लक्ष्मी जी की चाहत में पूजन के लिए साम्रगी का आर्डर करते लोग ।

लक्ष्मी स्वरूपा धन के अनुचित उपयोग से लक्ष्मी जी का दमघोटू परिस्थिति में पीड़ा झेलते देखकर नारद आत्म ग्लानि से भर गए ।

धारयेति इति धर्म अर्थात जो धारण करने योग्य गुण हो वही धर्म है ऐसे धर्म की साधारण सी व्याख्या लोग नहीं समझ पा रहे थे ।

माला , तजबी और रोज़री को फेरने में लगे लोग मन को सत्य की ओर क्यों नहीं फेर पा रहे थे , इसका उत्तर नारद के पास भी नहीं था ।

नारद ने कलियुग की अवस्था का अनुमान लगाया और उन्हें भान हुआ कि बिना सोचे समझे आभासी दुनिया के भ्रम व अंतरजाल में फँसे लोगो की सुन अपने स्वामी पर संदेह करने लगे थे , मोह और मोहनी के कारण सदैव ही उन्होंने अपने भगवन पर संदेह किया और भगवान फिर भी उन पर कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं । कृतज्ञता का नीर नारद के आँखों से झर झर झरने लगा और मुख से नारायण नारायण का जाप ।

झट से अपने लैपटाप को स्लीप मोड पर रखते हुए श्री हरि के सामने घुटने टेक कर बैठते हुए वे बोले ,“ मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई भगवन ! अब आप ही सहायता कीजिए ।"

भगवन बोले , " भूल हुई है तो उसे सुधारिए , प्रिय नारद ! जाइए और पृथ्वी वासियों को सत्य व्रत का सहज व अपडेटेट संस्करण सुनाइए जिससे वे सत्य के यथार्थ स्वरूप को समझें । मात्र अन्न का त्याग करके व्रत पूरा समझने की भूल करने वालों को सत्य आचरण का व्रत पालन करने को कहिए ! "

नारद के मुख पर प्रसन्नता का प्रशांत भाव उमड़ पड़ा वे बोले," समझ गया , भगवन ! मानवता का परचम सदा शिखर पर हो इसके लिए सत्य व्रत का पालन जरूरी है ।

नारद जी के फोन की घंटी बजी , सत्य तक का रिपोर्टर खुश व तैयार था नारद जी पर हल्ला बोलने के लिए ।

रिपोर्टर के सवाल के पहले ही नारद जी ने कहा ,

कलियुग केवल नाम अधारा ,

सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा ।

रिपोर्टर ने पूछा ... कौन सा नाम ?

सत्य ही विष्णु , सत्य ही राम ,

श्वास श्वास , जपो प्रभु नाम ।

रिपोर्टर ने आग्रह किया देवदूत महाशय अपनी बात स्पष्ट कहें । नारद जी बोले , " सत्य ही शिव है , इसलिए सत्यआचरण की जवाबदेही लेनी होगी पृथ्वी वासियों को ।

सभी कष्ट दूर होंगे । नारायण , नारायण । "







 
 
 

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